कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण पक्ष में आती है। यह एकादशी विशेष रूप से—
• पाप नाश
• ब्राह्मण-हत्या समान दोष शमन
• पूर्वज दोष शांति
• विष्णु कृपा प्राप्ति , के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है।
कामिका एकादशी — संपूर्ण पूजा-विधि
(श्रावण कृष्ण पक्ष )
कामिका एकादशी श्रावण मास की कृष्ण पक्ष में आती है। यह एकादशी विशेष रूप से—
• पाप नाश
• ब्राह्मण-हत्या समान दोष शमन
• पूर्वज दोष शांति
• विष्णु कृपा प्राप्ति , के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी गई है।
1️⃣ प्रातः स्नान एवं शुद्धि
• ब्रह्ममुहूर्त में जागें
• गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें
• शुद्ध, सादा या पीले वस्त्र पहनें
• मन में यह भाव रखें—
“हे श्रीहरि, मेरे जाने–अनजाने पाप आज इस व्रत से नष्ट हों।”
2️⃣ संकल्प विधि
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें। दाएँ हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लें। भावात्मक संकल्प—
“अहं अमुक नाम, श्रावण मासे कृष्ण पक्षे कामिका एकादश्यां श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं व्रतं करिष्ये।” संकल्प के बाद जल भूमि पर छोड़ दें।
3️⃣ वेदी की स्थापना
(घर में वैकुण्ठ भाव) वेदी पर रखें—
• भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण का चित्र
• पीला वस्त्र
• तुलसी दल
• शंख
• दीपक
• धूप
• चंदन
• पुष्प
• फल या मिष्ठान्न (बिना अन्न)
4️⃣ दीप प्रज्वलन — पापनाश दीप
घी का दीप जलाते हुए प्रार्थना करें— “हे नारायण, जैसे यह दीप अंधकार मिटाता है, वैसे ही मेरे जीवन के पाप और भ्रम मिट जाएँ।”
5️⃣ भगवान विष्णु का आवाहन
11 या 21 बार जप करें— ॐ नमो भगवते वासुदेवाय फिर कहें— “हे श्रीहरि, कृपा कर मेरे हृदय में अपनी दिव्य उपस्थिति प्रदान करें।”
6️⃣ श्रीविष्णु पूजन क्रम
पूजन इस क्रम से करें—
1. गंगाजल अर्पण
2. चंदन–रोली–अक्षत
3. पुष्प अर्पण
4. तुलसी दल (अनिवार्य)
5. धूप
6. दीप
7. नैवेद्य (फल, पंचामृत)
पूजन भाव— “हे पापनाशक, मुझे शुद्धि का मार्ग दिखाइए।”
7️⃣ विशेष मंत्र-जप
कामिका एकादशी में यह मंत्र विशेष फल देता है— ॐ नमो नारायणाय (108 या 1008 जप)
• पाप शमन, भय नाश, मानसिक शांति के लिए श्रेष्ठ
8️⃣ कथा-पाठ (अत्यंत आवश्यक)
कामिका एकादशी की कथा श्रवण अथवा पाठ करना अनिवार्य है। शास्त्रों में कहा गया है— “कथाविहीनं व्रतं निष्फलम्” अर्थात कथा बिना व्रत अधूरा है।
9️⃣ दान विधान
इस दिन विशेष रूप से—
• अन्न दान
• वस्त्र दान
• तिल दान
• दक्षिणा
दान करते समय भाव रखें— “हे प्रभु, यह दान मेरे पापों की शुद्धि बने।”
🔟 रात्रि हरिनाम स्मरण
पूर्ण जागरण आवश्यक नहीं, पर—
• विष्णु सहस्रनाम
• हरिनाम जप
• भागवत स्मरण , कम से कम 1 घंटा अवश्य करें।
1️⃣1️⃣ द्वादशी पारण
अगले दिन—
• सूर्योदय के बाद
• तुलसी अर्पण करें
• सात्त्विक भोजन ग्रहण करें
प्रार्थना— “हे श्रीहरि, अज्ञानवश हुई त्रुटियाँ क्षमा करें।”
कामिका एकादशी का आध्यात्मिक रहस्य
• यह व्रत भयंकर पापों को भी शांत करता है
• विशेष रूप से श्रावण मास में इसका फल कई गुना होता है
• पितृदोष, भय, अपराधबोध में अत्यंत प्रभावी
• भगवान विष्णु की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है
कामिका एकादशी केवल उपवास नहीं— यह आत्मा का प्रायश्चित है।
श्रीकामिका एकादशी व्रत कथा
ॐ नमो नारायणाय ॥
सूतजी बोले — हे ऋषियों! अब मैं आपको श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की कामिका नामक एकादशी की पुण्यमयी कथा सुनाता हूँ, जिसके श्रवण मात्र से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
प्राचीन काल की कथा
प्राचीन समय की बात है। एक ग्राम में एक क्रूर स्वभाव का मनुष्य निवास करता था। वह न तो धर्म जानता था,
न देवताओं का आदर करता था, न ब्राह्मणों का सम्मान। क्रोध, हिंसा और पाप ही उसका जीवन था। एक दिन वह किसी कारणवश एक ब्राह्मण की हत्या कर बैठा। ब्राह्मण-हत्या जैसा महापाप उसके जीवन पर छा गया।
भय, दुःस्वप्न, मानसिक पीड़ा और रोग उसे घेरने लगे। वह जहाँ भी जाता, उसे अपने पाप का दाह जलाता रहता।
शरण की खोज
अंततः अत्यंत दुःखी होकर वह एक महान विष्णु-भक्त महात्मा के पास पहुँचा। काँपते हुए बोला— “हे महात्मन्!
मुझसे घोर पाप हो गया है। क्या मेरे लिए भी कोई प्रायश्चित शेष है?” महात्मा ने करुण दृष्टि से उसे देखा और कहा— “वत्स! यदि मन में सच्चा पश्चाताप हो तो भगवान विष्णु के द्वार कभी बंद नहीं होते।”
कामिका एकादशी का उपदेश
महात्मा बोले— “श्रावण मास के कृष्ण पक्ष में कामिका नाम की एकादशी आती है। उस दिन श्रद्धा से भगवान श्रीहरि का पूजन करो, उपवास रखो, तुलसी अर्पण करो और इस व्रत की कथा सुनो।” उन्होंने कहा— “जो मनुष्य इस व्रत को करता है, उसके ब्राह्मण-हत्या समान पाप भी भस्म हो जाते हैं।”
व्रत का प्रभाव
उस पापी मनुष्य ने महात्मा की आज्ञा का पालन किया। श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी को—
• उसने प्रातः स्नान किया
• शुद्ध वस्त्र धारण किए
• भगवान विष्णु की पूजा की
• तुलसी दल अर्पित किए
• रात्रि में हरिनाम जप किया
उसने पूरे मन से प्रार्थना की— “हे नारायण! मैंने अज्ञान में पाप किया, कृपा कर मेरा उद्धार कीजिए।”
भगवान विष्णु की कृपा
उस रात्रि उसे स्वप्न में भगवान श्रीविष्णु के दर्शन हुए। भगवान बोले— “वत्स! तूने कामिका एकादशी का व्रत किया है। अतः तेरा घोर पाप नष्ट हुआ। अब भय मत कर।” स्वप्न टूटते ही उसके मन का समस्त भार उतर गया। उसके शरीर और मन से पाप का ताप समाप्त हो गया।
व्रत का महात्म्य
सूतजी बोले— हे ऋषियों! जो मनुष्य— कामिका एकादशी का व्रत करता है , विष्णु पूजन करता है , कथा का श्रवण करता है , उसे— राजसूय यज्ञ का फल , अश्वमेध यज्ञ का फल , समस्त तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है।
शास्त्रीय फलश्रुति
जो मनुष्य कामिका एकादशी का व्रत करता है, वह वैकुण्ठ लोक को प्राप्त होता है। उसके पितर भी तृप्त होते हैं।
जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
उपसंहार
अतः हे भक्तों! श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी भयंकर पापों का नाश करने वाली, मोक्ष प्रदान करने वाली और श्रीहरि को अति प्रिय है। जो श्रद्धा से इसका व्रत करता है, उसका जीवन पवित्र हो जाता है।
इति श्रीपद्मपुराणे
कामिका एकादशी व्रत कथा सम्पूर्णा।